दो जादुई बंगलों की कहानी | Hindi Story

1. बंगले में जादुई औरत | Hindi Story

बहुत समय पहले की बात है, गांव से कुछ ही दूरी पर जीवा का घर था उसके घर में उसकी पत्नी किरण और उनका एक बेटा राजू रहा करते थे। तीनो के तीनो दुबले पतले और कुपोषित थे।

जीवा जंगल में जड़ी बूटियां एवं लकड़ियां इकट्ठा करके उन्हें गांव में बेचा करता था। एक दिन एक ग्राहक जीवा की लकड़ियां खरीदने के लिए उसके पास पहुंचा और उसने जीवा से लकड़ियों का दाम पूछा।
जीवा ने जवाब दिया “मालिक मैं यह लकड़ियां केवल 5 सिक्के में बेच रहा हूं”

जीवा की बात सुनकर ग्राहक गुस्सा हो गया और उसने कहा “5 सिक्के तो ऐसे कह रहा है जैसे कि तू लकड़ियां मुफ्त में दे रहा है मुझे नहीं चाहिए तेरी लकड़ियां इन्हें तू अपने पास ही रख”!


यह सुनते ही जीवा कहता है “नहीं मालिक रुकिए आप जितना देंगे मुझे उतना मंजूर है”। जीवा की बात सुनकर ग्राहक रुकता है और बोलता है “यह ले फिर 3 सिक्के”।


जीवा वह तीन सिक्के ले लेता है और उसके बाद वह गांव के किराने की दुकान पर जाता है और पूछता है कि “भाई यह चावल कितने का है”
दुकानदार जवाब देता है “2 सिक्के का 1 किलो”
फिर जीवा दाल पूछता है
दुकानदार जवाब देता है “दाल 4 सिक्के प्रति किलो है”।

अब जीवा कहता है भाई मुझे 1 किलो चावल और एक पाव डाल दे दो।
दुकानदार जीवा को चावल और दाल देता है और कहता है इन दोनों के 3 सिक्के हुए, जीवा दुकानदार को 3 सिक्के दे देता है वह अपने दिन भर की कमाई से केवल थोड़ा सा चावल और दाल ही खरीद पाता है।

वह राशन लेकर घर पहुंचता है उस राशन से उसकी पत्नी खिचड़ी बनाती है और यही उनकी रोज की जिंदगी थी कुछ समय बाद मौसम बदला और बरसात शुरू हुई जीवा फिर भी जंगल गया और वहां उसने लकड़ियां काटी और एक बार फिर वह बाजार में लकड़िया बेचने लगा।


सुबह से शाम तक वह लकड़ियां बेचने के लिए चिल्लाता रहा कोई मेरी लकड़ियां ले लो, लेकिन बारिश की वजह से कोई उसकी लकड़ियां खरीदने नहीं आया।


इस बात से निराश होकर जीवा उन लकड़ियों को अपने कंधे पर लादकर घर की तरफ निकल पड़ा और बोलने लगा “आज मैं अपने परिवार के लिए खाने का इंतजाम तक नहीं कर पाया हे भगवान यह कैसी जिंदगी दी है मुझे”।


निराश जीवा अपने घर पहुंचा और अपनी पत्नी और बेटे के सामने रोने लगा। अगले दिन दोबारा से जीवा अपनी लकड़ियां बेचने गया लेकिन इस बार भी कोई खरीदार उसके पास नहीं आया शाम को एक औरत उसके पास आई और उसने उस से लकड़ियां खरीद ली और जीवा को 5 सिक्के दे दिए ।

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5 सिक्के देखकर जीवा बहुत खुश हुआ वह पैसे लेकर किराने की दुकान में पहुंचा और वहां उसने 1 किलो चावल और आधा किलो दाल खरीदा और अपने बेटे राजू के लिए एक सेब भी खरीद लिया, सारा सामान लेकर जीवा लौट ही रहा था की, जंगल में उसे एक बंगला दिखा और उस बंगले से एक बच्चे के रोने की आवाज आ रही थी।


बच्चे की आवाज सुनकर जीवा को चिंता सताने लगी वह उस बंगले में गया और वहां उसने देखा कि 4 से 5 साल का बच्चा रो रहा था।
उसने बच्चे से पूछा क्या हुआ बेटा तुम रो क्यों रहे हो बच्चा कुछ समय तक उसके सामने रोता रहा और फिर थोड़ी देर बाद बोला “मुझे बहुत भूख लगी है मैंने 3 दिन से कुछ नहीं खाया है”।
जीवा को उस बच्चे पर दया आ गई और उसने जो सेब अपने बेटे राजू के लिए लिया था वह उसे दे दिया।

वह बच्चा जल्दी-जल्दी उस सेब को खा गया और जीवा से बोला “क्या आपके पास खाने के लिए और कुछ है” जीवा ने कहा खाने के लिए तो है लेकिन इसे पकाना पड़ेगा। जीवा उस बंगले के रसोई में गया और उस चावल और दाल से उसने खिचड़ी बनाई और जीवा ने वह खिचड़ी उस नन्हे बच्चे को दे दी।

बच्चे ने वह खिचड़ी बड़े चाव से खाई और बोला अब मेरा पेट भर गया है।
और तभी एक औरत की आत्मा प्रकट हुई और उस आत्मा ने जीवा से बोला “शुक्रिया भैया आपने मेरे बेटे की भूख मिटाई मैं इसकी मां हूं और मेरे अलावा उसका और कोई नहीं है 3 दिन पहले मेरी मृत्यु हो गई थी तब से यह ऐसे ही भूखा था और मैं इसकी मदद नहीं कर पा रही थी।

यह सुनकर जीवा बोला “बहन तुम फिक्र मत करो मैं इसे अपने साथ ले जाऊंगा और जो मैं खाऊंगा वही इसे भी खिलाऊंगा।
यह सुनकर वह औरत बोली “भैया तुम बहुत नेक हो और इसीलिए मैं चाहती हूं कि तुम और तुम्हारा परिवार इसी बंगले में रहे, तुम्हें कभी खाने की कमी नहीं होगी सब कुछ मैं देख लूंगी तुम बस जल्दी से अपने परिवार को यहां लेकर आओ।


यह सुनकर जीवा खुशी-खुशी घर गया और अपने परिवार को लेकर बंगले में पहुंचा वहां पहुंचते ही उन्होंने देखा कि रसोई पूरी तरह से खाने-पीने के सामान से भरी पड़ी है।

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यह देख कर जीवा की पत्नी ने पकवान बनाए और वह सब साथ बैठकर पकवान खाने लगे उनके साथ अनाथ बच्चा भी बैठकर चाव से पकवान खा रहा था।
यह देखकर अनाथ बच्चे की मां की आत्मा बहुत खुश हुई क्योंकि उसके अनाथ बेटे को एक परिवार मिल चुका था इसके बाद जीवा और उसका परिवार उस जादुई बंगले में ही रहने लगे जहां खाने की चीजों की कोई कमी नहीं थी।

सीख : इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि कि दूसरों की मदद करने से हमारी मदद भी होती है। हमें हमेशा दूसरों की मदद के लिए आगे आना चहिये और उनकी मदद करनी चहिये!

2. सोने का बंगला | Story in Hindi

कुछ समय पहले की बात है राजेश नाम का एक लड़का था वह हर साल गर्मियों की छुट्टी में अपने नानी के घर घूमने आया करता था राजेश के नानी नाना एक दिन बातें कर रहे थे आज हमारे गांव का एक और आदमी गायब हो गया ऐसा कहा जाता है कि वह नदी के उस पार सोनापुर नामक गांव में सोने के बंगले की खोज में गया था।


तभी राजेश की नानी कहती है कि “अरे उस गांव में कोई सोने का बंगला नहीं है उधर एक बांग्ला है जिसमें भूत रहते हैं जब कोई नदी पार करके जंगल में जाता है तो उसे वह भूत पकड़ लेते हैं”।

यह सुनकर राजेश अपनी नानी से पूछता है कि “नानी क्या वास्तव में नदी के उस पार सोने का कोई बंगला है”
यह सुनकर उसकी नानी कहती है “पता नहीं बेटा हमने भी गांव वालों की तरह बस सुना है लेकिन तुम वहां कभी मत जाना”।


यह सुनकर राजेश बोलता है “लेकिन नानी नदी में तो नाव चलती है सोनापुर और हमारे गांव के लोग एक दूसरे के गाँव में आते जाते रहते हैं तो क्या सोनापुर में रहने वाले लोगों ने भी वह बांग्ला नहीं देखा”?
तभी राजेश के नाना कहते हैं “बेटा बहुत पहले एक ऋषि ने बताया था कि वह बांग्ला मायावी है किसी को दिखाई देता है और किसी को नहीं”।

छुट्टियां खत्म होने के बाद राकेश शहर में अपने घर आ जाता है एक दिन बहुत जोर का भूकंप आता है और राजेश एक टेबल को अपने सिर पर रखकर घर से बाहर निकल आता है लेकिन और कोई उसके घर से बाहर नहीं निकल पाता घर गिर जाता है और सारे लोग मर जाते हैं!

राजेश के नाना नानी राजेश को अपने गांव में ले आते हैं राजेश के नाना नानी गरीब होते हैं इसलिए राजेश की पढ़ाई नहीं हो पाती जब राजेश बड़ा हो जाता है तो उसके नाना नानी कहते हैं बेटा राजेश अब तुम शादी कर लो यही हमारी अंतिम इच्छा है, कुछ समय बाद राजेश की शादी हो जाती है और उसके नाना नानी का स्वर्गवास हो जाता है राजेश की पत्नी कुछ समय बाद दो बच्चों को जन्म देती है एक लड़का और एक लड़की।

राजेश अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए अपने गांव और सोनापुर गांव के बीच नदी में नाव चलाने का कार्य करने लगता है वह रोजाना सवारियों को इस पार से उस पार ले जाता और उधर से भी सवारियों को भर कर लाता है।


तभी वह देखता है कि नदी में एक हिरण डूब रहा है राजेश तुरंत नदी में छलांग लगाता है और राजेश डूबते हुए हिरण को बाहर निकालकर नदी के किनारे लेकर आता है हिरण जंगल की तरफ भाग जाता है राजेश को जंगल में कोई चमकती हुई चीज दिखाई देती है जब वह आगे जाकर देखता है तो वह हैरान रह जाता है और एक बहुत बड़ा सोने का बंगला उसकी आंखों के सामने होता है।

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बंगले को देखकर राजेश बोलता है अच्छा तो यही वह मायावी बंगला है जिसकी कहानियां मैं बचपन से सुनते आ रहा हूं लेकिन आज मुझे यह कैसे दिखाई दे रहा है मैं तो यहां रोजाना आता हूं

और आज तक मुझे यह दिखाई नहीं दिया, यह बोलकर राजेश बंगले के अंदर जाता है और बंगले से एक आवाज आती है “तुम्हारा स्वागत है राजेश मैं सोने का बंगला हूं अगर तुम इस बंगले में अपने घर की 10 साल पुरानी कोई भी चीज लाकर छोड़ दोगे तो वह सोने की हो जाएगी”।

यह सुनकर राजेश बोलता है मैं तो तुम्हें बचपन से ही ढूंढ रहा हूं लेकिन तुम आज ही क्यों दिखाई दिए। यह सुनकर उस बंगले से दोबारा आवाज आती है मैं केवल उसी व्यक्ति को दिखाई देता हूं जो दूसरों की मदद करते हैं आज तुमने डूबते हुए हिरण को बचाया इसलिए मैं तुम्हें दिखाई दे रहा हूं!

राकेश तुरंत अपने घर जाता है और अपने घर के बाहर लगे अनार के पेड़ से कुछ अनार तोड़कर बंगले में ले आता है और वहां रख देता है अनार तुरंत सोने के हो जाते हैं फिर राजेश अपने घर से चारपाई उठाकर बंगले में ले जाता है और चारपाई भी सोने की हो जाती है!

अब राजेश जब भी सवारियों को बैठाकर अपने गांव से उस पार जाता तो अपने घर से कोई ना कोई सामान उस बंगले में जरूर लेकर जाता और उसे सोने में बदल कर वापस घर ले आता।


अब राजेश सोने को लेकर सुनार के पास जाता है और बोलता है “काका सोने के अनार के आप कितने पैसे देंगे यह सुनकर सुनार बोलता है मैं आपको इसके पूरे 50,000 दूंगा।


इस तरह राजेश ने अपने घर में अच्छे खासे पैसे जमा कर लिए, अब राजेश के मन में लालच आ गया और उसने सोने के बंगले वाली बात अपनी पत्नी को बताई और उससे कहा देखो आज हमारे घर पर 10 साल पुरानी जितनी भी चीजें थी मैं उन सबको सोने में बदल चुका हूं

अब तुम पड़ोसी रेखा के घर पर चली जाओ उसके घर में बहुत बड़ा एक पुराना सा बक्सा रखा हुआ है तुम किसी भी तरह रेखा को उसके घर से बाहर ले जाना और फिर मैं उसके घर जाकर बक्सा चुरा लूंगा अगर उस बच्चे को मैंने सोने में बदल दिया तो हम मालामाल हो जाएंगे और गांव में सबसे बड़ा घर बनाएंगे।

यह सुनकर राजेश की पत्नी पड़ोसी रेखा के घर जाती है और कहती है “अरे रेखा तुम्हें पता है क्या बाजार में साड़ियों की एक नई दुकान खुली है सभी लोग वहां से साड़ियां लेकर आ रहे हैं आज मैं भी जा रही हूं तुम भी मेरे साथ चल सकती हो”

यह सुनकर रेखा कहती है ठीक है मैं भी आपके साथ चलती हूं और वह दोनों बाजार की तरफ निकल जाते हैं राजेश चुपके से रेखा के घर में घुसता है और बक्सा चुराकर अपने घर रख लेता है

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अगले दिन राजेश और उसकी पत्नी उस बक्से को उठाकर अपने साथ महल में ले जाते हैं जैसे ही वह दोनों बक्से को लेकर सोने के महल में घुसते हैं बक्सा तो सोने का नहीं बनता लेकिन राजेश की पत्नी सोने की बन जाती है!

और बांग्ला एकदम से गायब हो जाता है यह देखकर राजेश रोने लगता है और कहता है “हे भगवान यह मेरी पत्नी को क्या हो गया अब मेरी पत्नी कैसे ठीक होगी मैं क्या करूं” तभी एक साप वहां आता है और कहता है मैं हजार साल से जिंदा हूं तुमने लालच किया और अपने पड़ोसी का बक्सा चुरा लिया

इसलिए बंगला गायब हो गया उसने तुम्हारी पत्नी को सोने का बना दिया यह सुनकर राजेश उस सांप से कहता है “मुझे माफ कर दीजिए मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई मुझे लालच नहीं करना चाहिए था मैं वादा करता हूं अब जिंदगी में कभी लालच नहीं करूंगा और यह बक्सा भी अपनी पड़ोसी को लौटा दूंगा”

यह सुनकर सांप राजेश की पत्नी को वापस से पहले जैसा बना देता है।

सीख : इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने जीवन में कभी भी लालच नहीं करना चाहिए और हमारे पास जो भी है हमें उसमें अपने आप को भाग्यशाली समझना चाहिए कि हमें इतना मिला है।

अंतिम शब्द :

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